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About the Book: वरिष्ठ प्रबंधक के पद की गरिमा और पावर सूट की सख्ती के पीछे एक मीरा की आँखों में एक ऐसा मन छिपा है, जो वर्तमान से ज्यादा अतीत में धड़कता है।मीरा के लिए इतिहास केवल पन्नों पर छपी तारीखें नहीं हैं; उसके लिए वह एक जीवंत अनुभव है। वह उन खियों की पदचाप सुनती है जिन्होंने सदियों पहले पितृसत्ता और व्यवस्था की बेड़ियों को चुनौती दी थी। दिन भर की मीटिंग्स के बाद जब वह घर लौटती है, तो वह मीरा नहीं रहती वह उन सियों को अपने भीतर महसूस करने लगती है।
उसका नारी अस्तित्व के प्रति सचेत होना मात्र एक विचार नहीं, बल्कि एक जुनून बन चुका है। वह अलग-अलग कालखण्ड की संघर्षशील खियों को अपने कमरे में, अपनी बातचीत में और अपने फैसलों में साक्षात अनुभव करने लगती है। यह जुड़ाव धरि-धीर उसे दर्शनशास के प्रैक्सिस की उस अवस्था में ले जाता है, जहाँ सिद्धांत और व्यवहार का अंतर मिट जाता है।
उसके लिए इतिहास अब एक किताब नहीं, बल्कि एक दर्पण बन गया है, जिसमें बह अपनी हर साँस को उन महान स्त्रियों के संघर्ष से बोलती है।
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